श्रीनागदेव आरती पंचमीकी कीजै । तन मन धन सब अर्पण कीजै । नेत्र लाल भिरकुटी विशाला । चले बिन पैर सुने बिन काना । उनको अपना सर्वस्व दीजे।। पाताल लोक में तेरा वासा । शंकर विघन विनायक नासा । भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै।। शीश मणि मुख...